कादर खान नहीं रहे, अमिताभ ने कहा- मेरी ज्यादातर सफल फिल्में उन्होंने ही लिखीं

अभिनेता, डायलॉग राइटर और स्क्रिप्ट राइटर कादर खान का सोमवार को 81 साल की उम्र में कनाडा में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे और चार महीने से अस्पताल में भर्ती थे। बेटे सरफराज ने उनके निधन की पुष्टि की। कनाडा में ही उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

अमिताभ बच्चन ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘"कादर खान प्रतिभा के धनी और फिल्मों के लिए समर्पित कलाकार थे। वे गजब के लेखक थे। मेरी ज्यादातर कामयाब फिल्में उन्हीं ने लिखीं। वे मेरे अजीज दोस्त रहे। वे गणितज्ञ भी थे।'' अमिताभ और कादर ने ‘दो और दो पांच’, ‘अदालत’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘कुली’, ‘कालिया’, ‘शहंशाह’ और ‘हम’ समेत 21 फिल्मों में साथ बतौर अभिनेता या डायलॉग-स्क्रिप्ट राइटर काम किया था।

डिसऑर्डर से पीड़ित थे

कादर को प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर हो गया था। यह शरीर की गति, चलने के दौरान बनने वाले संतुलन, बोलने, निगलने, देखने, मनोदशा और व्यवहार के साथ सोच को प्रभावित करता है। यह डिसऑर्डर मस्तिष्क में नर्व सेल्स के नष्ट होने के कारण होता है। कादर खान पिछले कई साल से कनाडा में ही अपने बेटे-बहू सरफराज और शाइस्ता के साथ रह रहे थे। बीते कुछ वक्त से सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। 2017 में उनके घुटने की सर्जरी हुई थी। तब से वे ज्यादा देर तक चलने में डरते थे, उन्हें लगता था कि वे गिर जाएंगे।

1973 से की थी फिल्मों में शुरुआत

22 अक्टूबर 1937 को कादर खान काबुल में एक भारतीय-कनाडाई परिवार में पैदा हुए थे। 1973 में उन्होंने यश चोपड़ा की फिल्म ‘दाग’ से करियर की शुरुआत की। 1970 और 80 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों के लिए कहानियां लिखीं। स्क्रिप्ट राइटिंग शुरू करने से पहले वे मुंबई के एमएच साबू सिद्दीक इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के लेक्चरर थे। परिवार में उनकी पत्नी अजरा और दो बेटे सरफराज और शहनवाज खान हैं।

अमिताभ, जया प्रदा और अमरीश पुरी के साथ फिल्म बनाना चाहते थे

एक इंटरव्यू के दौरान कादर खान ने बताया था, ‘"मैं अमिताभ बच्चन, जया प्रदा और अमरीश पुरी को लेकर फिल्म 'जाहिल' बनाना चाहता था। उसका डायरेक्शन भी मैं खुद ही करना चाहता था, लेकिन खुदा को शायद कुछ और ही मंजूर था। इसी बीच 'कुली' की शूटिंग के दौरान अमिताभ को चोट लग गई। वे महीनों अस्पताल में भर्ती रहे। अमिताभ के अस्पताल से वापस आने के बाद मैं दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गया। अमिताभ भी राजनीति में चले गए। उसके बाद मेरी और अमिताभ की यह फिल्म हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में चली गई।’’

1983 में आई फिल्म ‘कुली’ कादर खान के करियर की सुपरहिट फिल्मों में शामिल है। मनमोहन देसाई के बैनर तले बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म सुपरहिट रही थी।
शक्ति कपूर के साथ कादर खान की जोड़ी काफी पसंद की गई। दोनों ने करीब 100 फिल्मों में साथ काम किया।
1982 और 1993 में आई फिल्मों ‘मेरी आवाज सुनो‘ और ‘अंगार’ में बेस्ट डायलॉग के लिए कादर खान को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और सिनेमा में योगदान के लिए उन्हें साल 2013 में साहित्य शिरोमणि पुरस्कार भी मिला था।

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